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वे दोनों

वे दोनोँ मौजूद थे कभी जिनके मौन में भी थीं ढेर सारी बातें !! जिनकी आँखें भीड़ में भी पल भर को टकराकर रचती थीं आख्यानक !! ...

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बातें

बातें
सायास नहीं
अनायास की जाए तो
ज़्यादा सुंदर होती हैं.
बातें
लफ़्ज़ों से नहीं
आँखों से की जाए तो
ज़्यादा मार्म...

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माँ और मैं

माँ से पहले मैं
न तत्व थी
न अस्तित्व था
न जान थी
न जीवन था
माँ ने दिया सब कुछ मुझे
हे माँ अपर्ण हर पल तुम्हें
जीव...

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