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कविता रचना कठिन काम है

भावों के उछाल को

दिमाग के सवाल को

बाँध पाना, संयत बनाना

बड़ा कठिन काम है दोस्त,

तुम कितनी सरलता से कहते हो

आज कल कुछ लिखो विखो

और कुछ नहीं तो

कविता ही कर डालो,

शायद तुम नहीं जानते दोस्त

यूँ कागज़ कलम उठाकर

बुन देने से मकड़जाल

कविता नहीं रची जाती,

कविता उगती है

भावों के स्पंदन से

विचारों की दरारों में,

तोड़ती है मन की कुंठाएँ

खोलती है खिड़कियाँ

छनकर पहुँचती है जहाँ से

धूप और हवा

कविता रचती है इतिहास

बुनती है भविष्य

उठाती है प्रश्न

जगाती है वर्तमान

ताकि हम सोने न पाएँ

ताकि हम रोते न रह जाएँ!