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तुम्हारी आँखें……

जब ढलता सूरज आख़िरी बार चमकता

मेरी आँखें वहीं थम जाया करती

और तुम्हारी आँखें……

किसी गाने की दो पंक्तियाँ चुराकर

तुम बताने की न बताने वाली कोशिश करते

और हम हँसकर समझ जाते

वही जो हम हर पल के साथ में

अपनी हर बात में

एक दूसरे से कह देने के लिए

वक्त को थामे रहना चाहते थे !