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कितना प्रेम है....

कितना प्रेम है....
क्या तभी जान पाओगे
जब मैं तुम्हें दूँ
गुलाब का लाल फूल.
अगर मैं गेंदे का फूल दूँ
या कोई फूल न भी दूँ
तो क्या जानना मुश्किल होगा
कितना प्रेम है..

मैं चाहती हूँ हमारे प्रेम को
इन छोटे-छोटे उपमानों की
या अन्य किसी सामानों की
कोई ज़रूरत न रह जाए.
हमें न हो इंतज़ार
किसी दिन विशेष का
किसी तोहफे का
कि हमें जताना पड़े
कितना प्रेम है.